पब्लिक रिलेशन सोसाइटी ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय महोत्सव का सफलतापूर्वक समापन हो गया। महोत्सव के अंतिम दिन चार सत्रों का आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न विषयों पर वक्ताओं ने विचार साझा किए। तकनीकी सत्रों के अलावा अपने क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले संस्थानों और व्यक्तिओं को सम्मानित किया गया। शानदार तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय महोत्सव समापन सत्र के साथ सम्पूर्ण हुआ।
सम्मान समारोह एवं समापन सत्र में राज्यसभा सांसद डॉ. सोनल मानसिंह, मॉरीशस के राजदूत श्री एच डिलुम, विदेश मंत्रालय के राजदूत श्री राजशेखर एवं पीआरएसआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अजीत पाठक, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष (नोर्थ) नरेंद्र महता, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष (ईस्ट) एमएस मजूमदार, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष (साउथ) यूएस सरमा, सेक्रेटरी जनरल डॉ. पीएलके मूर्ति, इंडिया टुडे मीडिया इंस्टीट्यूट के अधिष्ठाता और निदेशक ध्रुबा ज्योति पति मौजूद रहे।

राज्यसभा सांसद डॉ. सोनल मानसिंह ने कहा कि लोकतंत्र में कूटनीति एक प्रकार का जनसंपर्क का कार्य करती है। कोरोना काल में भारत ने विदेशों में वैक्सीन पहुंचाकर सभी का जो सहयोग किया, वह वैश्विक जनसंपर्क को लेकर भारत की दूरदर्शिता को दर्शाता है। वहीं मॉरीशस के राजदूत श्री एच डिलुम ने बताया कि जनसंपर्क किसी भी संगठन या व्यक्ति विशेष को मजबूती प्रदान करता है। एक सकारात्मक तरीके से किए गए संचार से विश्व में शांति को स्थापित किया जा सकता है।

विदेश मंत्रालय से आए श्री राजशेखर ने अपने भाषण में कहा कि विभिन्न देशों के साथ संबंध स्थापित करने के लिए इस तरह के जनसंपर्क कार्यक्रम लाभकारी सिद्ध होते हैं। सम्मान समारोह एवं समापन सत्र का मंच संचालन क्रमशः शीतल शर्मा और देव कन्या ने किया।
अंतिम दिन के पहले सत्र का विषय ‘भारत- विश्व का आध्यात्मिक गुरु’ रहा, जिसकी अध्यक्षता ग्राफिक्सएड्स के अध्यक्ष श्री मुकेश गुप्ता ने की। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के साथ जुड़ने के कारण बचपन से ही मुझे आध्यात्मिक वातावरण मिला। वहां मुझे मेडिटेशन के विषय में ज्ञात हुआ एवं ध्यान के माध्यम से मैं सफल जीवन जीने की कला सीख सका। अध्यात्म के महत्व को जन-जन तक पहुंचाने के लिए हमने साधना चैनल की शुरुआत की।
‘भारतीय मूल्यों के माध्यम से विश्व शांति’ विषय पर बोलते हुए विश्व शांति दूत एचएच आचार्य मुनि लोकेश ने कहा कि बदलाव के लिए प्रयोग आवश्यक है। हमारी प्राचीन शिक्षा प्रणाली में ज्ञान के साथ प्रयोग भी आत्मसात था। आज की शिक्षा भौतिकवाद में उपयोगी हो सकती है, परंतु मन की शांति से ही विश्व में शांति होगी।
ब्रह्मकुमारी गुरुग्राम आश्रम से बहन बीके हुसैन ने ओम शांति का मंत्र देते हुए कहा कि अंतर्राष्ट्रीय महोत्सव में आध्यात्मिक गुरुओं को बुलाने के लिए पीआरएसआई को धन्यवाद दिया। जनसंपर्क के माध्यम से लोग एक दूसरे से जुड़ते हैं लेकिन जुड़ने का अर्थ केवल हाथ मिलाना, नंबर या कार्ड बदलना नहीं है। जुड़ने का अर्थ है हृदय की भावना से लोगों को स्वयं की तरफ प्रभावित करना। शांति मन के भीतर ही व्याप्त है बस आपको उसे समझने की जरूरत है।
गेल इंडिया लिमिटेड के कार्यकारी निदेशक (एचआर) श्री डी वी शास्त्री ने ‘भागवत गीता और प्रबंधन’ पर बोलते हुए कहा कि गीता ज्ञान का भंडार है, मन के विचलन को रोकने के लिए गीता का पाठ आवश्यक है। श्री कृष्ण कहते हैं कि निःसंदेह मन विचलित है, लेकिन निरंतर प्रयास से इसे स्थिर किया जा सकता है। गीता स्वयं, व्यक्तियों और संस्थानों को प्रबंधित करने का रास्ता प्रदान करती है। हमारे आचरण और कर्म में एकरूपता होगी तो ही हम एक अच्छे लीडर और मैनजर बन सकते हैं।
दूसरे सत्र की अध्यक्षता इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड एवं स्कोप के पूर्व चेयरमैन श्री सार्थक बहुरिया ने पीआरएसआई के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसा प्रयास समाज को सही दिशा देने के लिए आवश्यक है। उन्होंने जी-20 के विषय पर कहा कि जी-20 ने विकास के हर क्षेत्र में गति प्रदान की है, लेकिन उस गति को बरकरार रखना एक नई चुनौती है। वहीं, जीएसटी परिषद सचिवालय के अतिरिक्त सचिव श्री पंकज कुमार सिंह ने कहा कि जीएसटी से भारत के अर्थतंत्र में बड़ा बदलाव आया है। आजकल विज्ञापन और पीआर सेवा क्षेत्रों का विस्तार जिस तेजी से हो रहा है, वह देश की अर्थव्यवस्था में भी बड़ी भूमिका निभाएगा।
भारतीय जन संस्थान की प्रोफेसर डॉ. सुरभी दहिया ने भारतीय मीडिया इको-सिस्टम पर अपने विचार साझा करते हुए कहा कि 2007-2008 की मंदी के समय में मीडिया का शुरूआती दौर था, लेकिन आज इतने कम समय में भारतीय मीडिया की तरक्की सराहनीय है। विज्ञापन का क्षेत्र पहली बार एक लाख करोड़ के पार पहुंचा है। वहीं मीडिया और मनोरंजन के क्षेत्र में कंटेंट, वाणिज्य और समाज मूल स्रोत हैं। भारतीय मीडिया और मनोरंजन के क्षेत्र में पहली बार 2022 में 20 प्रतिशत की बढोत्तरी के साथ 2 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच चुका है। यह इस इको-सिस्टम को और मजबूत बनाने का कार्य कर रहा है।
शिक्षा भागीदारी राष्ट्रीय कौशल विकास निगम की महाप्रबंधक डॉ नीता प्रधान ने कौशल विकास पर अपना वक्तव्य रखते हुए कहा कि हर व्यक्ति में किसी न किसी प्रकार का कौशल अवश्य होता है। भारत भी कौशल विकास के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है और कौशल विकास व उद्यमशीलता मंत्रालय इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है। दूसरे सत्र का संचालन डॉ. सोनम महाजन ने किया।
तीसरे सत्र की अध्यक्षता पब्लिक रिलेशन सोसाइटी ऑफ इंडिया के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री समीर गोस्वामी ने की। उन्होंने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि स्वास्थ्य संचार की कोविड-19 के समय में महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उस समय लोगों को सलाह देने, सचेत करने और स्वास्थ्य की जानकारी देने में जनसंचार और जनसंर्पक ने विशेष योगदान दिया है।
अपोलो हॉस्पिटल, चेन्नई की जनसंपर्क हेड सुश्री सुगंती सुंदरराज ने ‘स्वास्थ्य संचारः कोविड-19 के बाद पीआर प्रोफेशनल्स का विस्तार’ विषय पर बोलते हुए कहा कि विश्व स्तर पर जब सभी कोरोना महामारी से सूझ रहे थे, उस वक्त भारत ने शोध व विकास के अद्भुत कार्यें करके अपनी क्षमता को दुनिया के सामने प्रदर्शित किया। स्वास्थ्यकर्मियों, पुलिस अधिकारियों, स्वच्छता कार्यकर्ताओं के साथ-साथ स्वास्थ्य संचार से जुड़े पीआर प्रोफेशनल्स का भी अहम योगदान रहा है। उनके बिना इस महामारी से निपटना नामुमकिन था।
वहीं, जन स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, मध्य प्रदेश के आईईसी निदेशक डॉ. रचना दूबे ने स्वास्थ्य जागरूकता के बारे में बात करते हुए कहा कि जनसंचार ने स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलना का काम किया है। लोगों को उनके स्वास्थ्य का खास ख्याल रखने, लगातार बढ़ रही बीमारियों को दूर करने के लिए व्यायाम करने तथा अव्यवस्थित दिनचर्या के कारण महिलाओं में पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) जैसी गंभीर बीमारियों की बढ़ती संख्या को रोकने के लिए जनसंचार माध्यम को और अधिक प्रयास करना होगा।
एचपीसीएल मुम्बई के पीआर और सीसी के मुख्य प्रबंधक श्री सुदीप्तो बसाक ने जन सम्पर्क में स्टोरी टेलिंग का मूल्यांकन विषय पर एक शोध का हवाला देते हुए कहा कि 68 प्रतिशत तक कंज्यूमर ब्रांड स्टोरी से प्रभावित होकर खरीदने का निर्णय लेते हैं। इसलिए एक पीआर विभाग को एक बेहतर हथियार के रूप में उपयोग किया जा सकता है। अपने पीआर को बेहतर और व्यवस्थित तरीके से बढ़ाने के लिए स्टोरी टेलिंग एक बेहतर विकल्प है।
वहीं, विजीकी के सह संस्थापक सुश्री आकृति भार्गव अपने विचार रखते हुए कहा कि पीआर को आसान बनाने के लिए तकनीक का भरपूर उपयोग किया जा सकता है। वर्तमान में एआई का उपयोग इसे बहुत आसान बना सकती है।
अंतिम दिन के तीसरे सत्र का मंच संचालन डॉ. नेहा ने किया। तीन दिवसीय महोत्सव के अंतिम सत्र की अध्यक्षता विवेकानन्द इंस्टीट्यूट ऑफ प्रोफेशनल स्टडीज की संकायाध्यक्ष डॉ. चारुलता सिंह ने की। उन्होंने अपने अध्यक्षीय भाषण में विभिन्न महत्वपूर्ण फोटोग्राफ का उदाहरण देते हुए कहा कि फोटो संचार का एक शक्तिशाली टूल है। इसके सही और अधिक उपयोग संचार को सरल, रोचक और प्रभावशाली बनाता है।
इंडिया टुडे के पूर्व मुख्य फोटोग्राफर शेखर घोष ने पेशेवर फोटोग्राफी: कॉर्पोरेट कहानी के लिए नींव पर बोलते हुए कहा कि एक फोटोग्राफर को पूरी जिम्मेदारी और ईमानदारी के साथ काम करना चाहिए। अपने पेशे के साथ समाज के प्रति अपने दायित्व को समझने की भी जरूरत है। हमेशा कोशिश करनी चाहिए कि पैसों से ज्यादा काम को महत्वता दें।
दूरदर्शन की पहली कैमरा पर्सन इंदु दांग ने कहा कि महिलाएं फोटोग्राफी में लगातार आगे बढ़ रही हैं। मेरा सफर काफी मुश्किल भरा रहा, क्योंकि महिलाओं को उनकी सीमाएं समाज निर्धारित कर देता है। मैंने समाज की सीमाओं को पार करके कैमरापर्सन के रूप में अपनी पहचान बनाई। अंतिम सत्र का संचालन डॉ. नेहा जिंगला सत पीआरएसआई के सेक्रेटरी जनरल डॉ. पीएलके मूर्ति ने धन्यवाद ज्ञापित किया। राष्ट्रगान के साथ तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय महोत्सव का सफलतापूर्वक समापन किया गया।
