राष्ट्रीय जनसंपर्क दिवस पर ‘सनातन मूल्य और उभरता भारत : जनसंपर्क की भूमिका’ विषय पर चर्चासत्र
चिरंतन और नूतन है जनसंपर्क : प्रो. आनंद पाटील
वर्धा, 22 अप्रैल 2024 : राष्ट्रीय जनसंपर्क दिवस के उपलक्ष्य में रविवार, 21 अप्रैल को पब्लिक रिलेशन्स सोसायटी ऑफ इंडिया के वर्धा चैप्टर तथा यशवंतराव दाते स्मृति संस्था, वर्धा के संयुक्त तत्वावधान में ‘सनातन मूल्य और उभरता भारत : जनसंपर्क की भूमिका’ विषय पर आयोजित चर्चासत्र में महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के दूर शिक्षा निदेशालय के निदेशक प्रो. आनंद पाटील ने कहा कि जनसंपर्क अपनी भूमिका बखूबी निभा रहा है इस कारण वह अपने धर्म का ध्वजवाहक बन गया है। जो बात हुई है उसे समेटते हुए रखना जनसंपर्क का वैशिष्ट्ये है। सनातन मूल्य और उभरते भारत के लिए जनसंपर्क चिरंतन और नूतन है। कार्यक्रम का आयोजन विदर्भ साहित्य संघ के अध्यक्ष प्रदीप दाते के साबले प्लॉट स्थित निवास पर किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता पब्लिक रिलेशन्स सोसायटी ऑफ इंडिया के वर्धा चैप्टर के अध्यक्ष डॉ. राजेश लेहकपुरे ने की। इस अवसर पर विशेष अतिथि के रूप में यशवंतराव दाते स्मृति संस्था पुरस्कार समिति के संयोजक डॉ. राजेंद्र मुंढे उपस्थित थे। प्रो. पाटील ने सनातन शब्द की व्याख्या करते हुए कहा कि सबको साथ लेकर चलना सनातन का कार्य है। यह शब्द सबका विकास चाहता है। वसुधैव कुटुंबकम् भारत की धारणा है और इसी धारणा से हम सभी के प्रति समान दृष्टि रखते हैं। उन्होंने महाभारत का उदाहरण देते हुए संजय के संवाद को एक अच्छे जनसंपर्क का प्रसंग बताया। उन्होंने कहा कि हमारी सभ्यता के विकास में जनसंपर्क की अहम भूमिका रही है। उन्होंने उभरते भारत के संदर्भ में जी20 और ज्ञान, विज्ञान के क्षेत्र में भारत की बढ़ती साख पर भी प्रकाश ड़ाला।
डॉ. राजेंद्र मुंढे ने कहा कि सत्य, अहिंसा, प्रज्ञा, शील, करूणा और शांति इन मूल्यों को समाज में स्थापित करने में जनसंपर्क की महत्वपूर्ण भूमिका है। विश्व में इन्ही तत्वों के कारण भारत की पहचान स्थापित हुई है, वास्तव में यही भारतीय मूल्य हैं। उन्होंने तथागत बुद्ध, साने गुरुजी और राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज के विचार-दर्शन में सामाजिक विकास के मूल्यों का उल्लेख किया और कहा कि सनातन शब्द में सक्रियता, नाविन्यपूर्णता, तत्व की व्यापक दृष्टि समाहित है। भारत विज्ञान और प्रौद्योगिकी की प्रगति में अग्रेसर है और उभरते भारत की ओर दुनिया देख रही है। डॉ. राजेश लेहकपुरे ने कहा कि भारत को विकसित और विश्वगुरु बनाने की दिशा में जनसंपर्क एक महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है। समाज के साथ सीधा संपर्क रखकर उन्हें दिशा देने में जनसंपर्क की बड़ी भूमिका है।
कार्यक्रम का प्रारंभ जनसंपर्क गीत से किया गया। कार्यक्रम का संचालन सचिव बी. एस. मिरगे ने किया तथा कोषाध्यक्ष विनेश काकडे ने आभार माना। कार्यक्रम में पीआरएसआई के उपाध्यक्ष प्रफुल्ल दाते, डॉ. बालाजी चिरडे, नरेंद्र दंढारे, संघर्ष डाहाके, सचिन घोडे, डॉ. अमित विश्वास, आकाश दाते, उज्वला घोडे, वृषाली बकाल, प्रिया कुमारी, आशुतोष साहुरकर, विकास मिश्र, राम फरांडे, रजत बत्रा, अभिषेक द्विवेदी, पंकज कलाने, मनन्य सिंह निर्वाण, मोहित भारद्वाज, अश्विन श्रीवास आदि उपस्थित रहे।

